यादें...

यादे....! 

जब हम दुनिया में नहीं रहते तब वही रह जाती है
और जब हम रहते है तो उसी से हमारा अस्तित्व बनता है

मेरी मानों तो कभी भी कुछ भी भूला नहीं जाता 
कभी कभी एक ज़टका चाहिए यादों को ताजा करने के लिए 

जरा सोचिए आपकी नींद खुले और पता चले आप भूत हो 
जो होना चाहिए था उसकी परछाई भार हो 
क्या आपकी असलियत खो गई है... लोग भूल चुके हैं उसको 
या फिर वॊ सो रहे है नींद खुलने के इंतजार में 
सच को चाहें जितना भी नीचे दफनाया गया हो 
लेकिन हमारा पास्ट सामने आ कर खड़ा हो जाता है 

हम सब कभी कभी रास्ता भटक जाते हैं 
हम गलत रास्ते पर निकल पड़ते हैं 
हमे जो चाहिए उसे बहुत दूर चले जाते हैं 
लेकिन जब आपको उसका अह्सास होता है 
तो आप वापिस आ सकते हैं क्या? 
या जो पीछे छुटा है वह हमेंशा के लिए खो जाता है? 

मुझे सुबह बहुत अच्छी लगती है 
वह शांति....जो सबके जागने से पहले होती है 
एक नए दिन की शुरूआत 
और यह उम्मीद की सबसे अच्छा दिन होगा 

भागों कृष्णा भागों.. क्युकी अंत तो अभी शुरू हुआ है 




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